-:जंबो सुधरा:-

लेखक:-एम मुबीन

सुंदर वन में रहने वाले हर जीव का कहना था जंबो हाथी बडा ही नटखट 5ारारती चंचल और बदमा6ा हो गया है

आए दिन नई नई 5ारारतें कर के वह जंगल के प्राणियों को तंग करता रहता है और सारे जंगल को सिर पर उठाता रहता है

जंगल के सारे प्राणी उसे समझा ते है

''जंबो इस तरह की 5ारारतें ठीक नहीं है तुम 5ारारत करते हो परंतु दूसरो को कं8ट होता है किसी को यूंही सताना अच्छी बात नहीं है किसी दिन अपनी इन 5ारारतो के करण तुम किसी घोर संकट में पड जाओगे

परंतु जंबो उनकी बातों पर ध्यान ही नहीं देता था छोटे छोटे प्राणी जानवर जंबो को केवल समझा ही सकते थे उस वि6ााल काया प्रणी से झगडा तो नहीं कर सकते थे ना टक्कर ले सकते थे

जांबो की 5ारारतें दिन ब दिन बढती ही जा रही थी वह जंगल से निकल कर गांव तक पहाुच जाता था आ।ैर गांव वालाेंं को भी अपनी 5ारारतों से तंग करता रहता था

कभी किसी खंत में घुस  गया तो उस खेत की सारी फसल हरी हरी घास की तैर पर खली ,जो बच गई रौंद कर न8ट कर दी

कभी खेत में बना टयूब वेल तोड डाला

तो कभी खेत में बने मकान झोपडियां धकका दे कर ,अपनी सूंड में लपेट कर तोड डाले

गांव वाले भी जंबो की हरकतों से परे6ाान हो गए थे अाए दिन गाव में खबरे गूंजती रहती थी

आज जंबो ने रामू के खेत की सारी फसल न8ट कर दी

आज जंबो ने के6ाव के खेत की फसल खा डाली

 आज जंबो ने सोनू का खेत में बना घर तोड डाला

जैसे ही गांव वालों को खबर मिलती जंबो किसी के खेत में घुसा है वे लाठियां हत्यार लेकर जंबो को मारने निकलते

परंतु तब तक तो जंबो अपना काम करके जा चुका होता था एक दो बार गांव वालों ने उसे घेरा भी

परंतु वह जंबो की ज्यादा पिटाई नही कर सके

जंबो एक दो आदमियों को सूंड में उठा कर, गांव वालाें को अंतकित कर के ,डरा कर भागने में सफल रहा गाव वाले सिर थामे बैठे थे

उन्हे कोई भी ऐसा उपाए नही सूझता था जिससे जंबो को सुधारा जा सके और उनका नूकसान भी  ना हो

 एक दिन जंबो  5ााम के समय ारारत करने के लिए जंगल से गांव की ओर चल दिया

उसनें राजू के खेत को अपनी 5ारारत का नि6ााना बनाना पहले ही तय कर लिया था

राजू के खेत में गन्ने की अच्छी फसल आई थी उसने तय कर लिया था कि वह आज पेट भर के राजू के खेत के गन्ने खांएगा और फिर सारे गन्ने उखाड कर फेंक देगा

राजू ने अपने रहने के लिए खेत में छोटा सा मकान बना रखा है उसे तोड कर न8ट करदेगा

अंधेरा होते ही वह खेत में घुसा

उसने पेट भर के गन्ने खाए

जब उसका पेट भर गया तो वह गप्ने उखाड उखाड कर इधर इधर उधर फेक कर फसल न8ट करने लगा

परंतु गनने की फसल इतनी ज्यादा थी के गन्ने उखाडते उखाडते जंबो थक गया

रात हो रही थी इस लिए उसने फसल न8ट करना छोड अपनी अन्तिम 5ारारत यानी खेत में बने रापजू के मकान को तोड कर वापस जंगल जाने का सोचा

वह मकान के पास आकर खडा हो गया

मन मेें आया कि अपने सिर की जोर दार टक्कर से मकान की दिवारें गिरादे फिर मन में विचार आया देखें भीतर क्या है,उन्हे भी तो न8ट करना है

दरवाजा बंद था राजू सोने के लिए नही आया था ,जंबो ने एक जोर दार टक्कर दरवाजे पर मारी दरवाजा खुल गया

जंबो भीतर चल आया

भीतर ज्यादा सामान नही था

नीचे एक दीपक जल रहा था

उस दीपक के उपर पटरे पर तीन चार केन रखे थे उन केन मे क्या है? सोचते जंबो ने एक केन अपनी सूंड में उठाया और उस का ढक्कन खोने की को6ाि6ा करने लगा

उनमे पेट्रोल था

जैसे ही ढक्कन खूला उस केन का तेल  पूरा जंबो के 5ारीर पर गिर गया

 झुंझला कर जैसे ही जंबो ने तीसरा केन उठाने की को6ाि6ा की वह उपर से नीचे गिर पडा

उस का ढक्कन खुल गया और पेट्रोल नीचे फैलने लगा नीचे दीपक जल रहा था

जैसे ही बहता पेट्रोल उस के पास पहुंचा एक 5ाोला लपका और पूरा घर आग में घिर गया

पेट्रोल तो जंबो के 5ारीर पर भी गिरा था

उसने भी आग पकड ली और जंबो आग में घिर गया

वह चिंगाडता घर से बाहर भागा

परंतु तब तक घर के भीतर लगी आग से उसके 5ारीर का बहुत बडा भाग झुलस गया था उस आग से बचा तो दूसरी मुसिबत उस के पीछे थी उसके 5ारीर पर जंहां जहां पेट्रोल गिरा था वहां आग लग गई थी और उस का 5ारीर जल रहा था

'बचाव बचाव' मदद के लिए वह जोर जोर से चीखने लगा और अपने 5ारीर में लगी आग बुझाने का प्रयत्न करने लगा

राजू उस समय अपने खेत पर सोने आया था उसने अपने घर में लगी आग और जंबो को आग में घिरा देखा तो वह घबरा गया जंबो बुरी तरहा चिंघाड रहा था

राजू ने स्वंय पर नियत्रंन पाने की का6ाि6ा की आरै जंबो की ओर लपका

और खेत की गीली मिटटी दोनों हाथो में उठाकर जंबो के 5ारीर के उन भागाें पर मारने लगा जहां आग लगी थी मिटटी आग पर गिरती तो आग बुझ जाती

जंबो समझ गया राजू का उसने इतना नुकसान किया परंतु राजू उस की सहायता कर रहा है

राजू ने मिटटी मार मार कर जंबो के 5ारीर में लगी आग बुझा दी

परंतु जंबो इस बुरी तरहा झुलस गया था कि घाओं की पीडा सहन ना कर के वह धरती पर गिर पडा

''बहुत र्दद हो रहा है ''राजू प्रेम से जंबो के घावों पर हाथ फेरते बोला'' ठहरो मैं तुम्हारे घाओं पर गीली मिटटी लगा देता हूं जलन और पीडा कम हो जाएगी''

राजू अपने जलते मकान की आग बूझााने का काम छोड कर गीली मिटटी बना कर जंबो के 5ारीर के जले भागाें पर लगाने लगा राजू का प्रमे देख कर जंबो की आंखों में प6चाताप के आंसू  आ गए

''मैेने इसका इतना नुंकसान किया परंतु यह मेरी सहायता कर रहा है''

घावों पर गीली मिटटी लग जाने के बाद जंबो की पीडा कम हो गई मकान की आग बुझ जाने के बाद राजू और ध्ध्यान से जंबो की सेवा करने लगा

 सवेरा होने पर जंबो चलने फिरने के योग्य हो गया

उसने  अपनी सूंड उठाकर राजू के प्रती कृतज्ञता जताई  और जंगल की ओर चल दिया

उसके बाद वह सुधर गया उसने फिर कोई 5ारारत नही की

 

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