-:जंबो ने धक्का लगाया:-
लेखक:-एम मुबीन
एक दिन 5ााम के समय जंबो और रामू 5ाहर से वापस आ रहे थे
5ााम होने वाली थी परंतु अंधेरा नहीं फैला था जंबो और रामू जिस रास्ते से 5ाहर जाते थे वैसे भी उस रास्ते पर यातायाता बहुत कम रहती थी रास्ता कहीं पहाडाें का तो कहीं जंगल का था
रास्ते में बहुत काम मैदान यो खेत मिलते थे और उस रास्ते पर कोई गाव या छोटा सा 5ाहर तो दस दस किलोमिटर के अंतंर से पहले नही था
अचानक रास्ते में उन्हें एक जगह एक बस खडी हुई दिखाई दी उस बस के गिरद बहुत से बच्चे खेल रहे थे
वे उस बस की ओर बढे
जंबो को दंखते ही बच्चे खू6ाी से चीखने लगे
''हाथीहाथी''
बहुत से बच्चों ने जंबो को पहचान लिया
''अरे यह तो जंबो है सलाम जंबो तूम यहा?''
''हम ने सपने में भी नहीं सोचा था कि तुम से यहां मुलाकात होगी''
बच्चो ने जंबो को घेर लिया और वे उस से बांते करने लगेउसके साथ खेलने लगेख़ाने की चीज उसे देने लगे
रामू जंबो से नीचे उतरा और बस के पास गया
बस का र्ड्राइवर और उस का सहायक बस का बोनट खोले उस पर झुके थे
''सलाम ड्र्राईवर साहब क्या बस में कोई बिगड हो गया हे ''रामू ने पूछा
''हां बस ड्र्राईवर ''बोला ''बिगाड एैसा है कि उसे हम ठिक नहीं कर पार हे हैं यदि हम 5ाहर जा कर कोई मेकानिक भी लाते हैं तो भी वह उस खराबी को दूर नहीं कर पाएगा ख़राबी दूर करने के लिए बस को किसी गेरेज में लेजाना पडेगा और यहां से सबसे समीप का गेरेज पांच किलो मिटर दूर है''
''पहली बात तो ये है कि बस अपनी जगह से एक इंच भी नही हिल पा रही है तो पांच किलो मिटर दूर किसी गेरेज तक कैसे पहोंच पाएगी''
''परंतू ये सब कैसे हूआ? ''रामू ने पूछा
''म6ाीन है कह नहीं सकते कब क्या हो जाए ,स्कूल के बच्चो को पिकनिक के लिए लाए थे पिकनिक से वापस हो रहे थे कि बस खराब हो गई 5ाहर यहां से 50 किलोमिटर दूर है यहां से जाने का कोई दूसरा साधन भी नही है थोडी देर में रात होने वाली है रात होते ही चोर डाकुओं का भ्य बढ जाएगा समय पर बस वापस नहीं पहुंच पाई तो बच्चो के मा बाप चिन्ंतित होंग''
''ड्रईवर स्राहब कुछ भी कीजिए समय पर हमे वापस पहुचा दीजिए, ''
बच्चो के साथ और टीचर कहने लगे ''
यदि हम समय पर वापस 5ाहर नहीं पहुंचें तो बच्चो के मा बाप चिंन्तित हो कर पता नहीं क्या क्या सोचलेगे''
''देखिए मैं सारी का6ाि6ों कर चूुका ह''ूं ड्रईवर बोला '''अब एक ही रास्ता रह गया है बस को धक्का मारते हुए यहां से पांच किलो मिटर दूर एक गेरेज ले जाएं वहां एक आध घंटे में बस बन जाए गी और हमें आसानी से एकाध घंटे मे ही सही समय पर 5ाहर पहुंच जाएगे''
''ड्र्रईवर साहब'' टीचर बोले ''हम तीन चार टीचर है ये छोंटे छोंटे बच्चे भला इस बस को पांच किलो मिटर तक किस तरहा धक्का लगा सकते है?''
''यदि ऐसा नही हूआ तो हमें रात भर यहां रुकना पडेगा आ।ैर चोर लूटेरे जंगली जानवर जैसे हजाराें खतरोंका सामना करना पडेगा हम समय पर वापस नहीं पहुंच पाए तो बच्चाें के मा बाप अलग परे6ाान होंगे यहां पर 5ााम होते ही यातायात बिलकुल बंद हो जाती है इसलिए हमें यहां से वापस जाने के लिए दूसरी कोई गाडी भी नही मिल सकती सवेरे कोई गाडी मिल जाए तो किस्मत''
ड्रईवर की बात सुनकर सब सन्ंनाटे में आ गए
सचमूच इस के इलावा कोई रास्ता नहीं था
'' यदि हम बस को धक्का मार कर गेरेज तक आठ बजे तक भी पहुंचा देते हैं तो एक घंटे में बस की खराबी दूर हो जाएगी और हम रात बाराह बजे तक घर पहूुच जाएगे क़ोई समसया ही पैदा नही होगी परंतु यदि हम ऐसा ना कर सकें और यहां रुक गए तो समस्या ही समस्या पैदा हो जाएगी''
ड्रईवर की ये बात सुनकर टीचर ने बच्चो को बुलाया जो जंबो के साथ खेल रहे थे जंबो भी उनके साथ आ गया
टिचरों ने सारी बात बच्चो को बताई और कहा कि हमे पांच किलो मिटर ताक इस बस को धकका दे कर लेजाना ैहै
ये सूुनकर सब बच्चे बस को धक्का देकर ले जाने के लिए तैयार हो गए
जंबो ने जब यह बात सुनी तो उस के मस्ति8क में एक बात आई
वह धीरे से चिंगाडा सिर हिलाया और फिर बस के पास जाकर धीरे से उसे धक्का देने लगा
'यह क्या कह रहा है'? सब आ6चर्य से रामू से पूछने लगे
'आप लोगो की समस्या का हल इसने सोच लिया है'' रामू मुस्काकर बोला'' यह कह रहा है बस को धक्का लगा कर गेरेज तक ले जाने के लिए आप लोग परे6ाान ना हो मैं अकेले बस को धकेलता गेरेज तक लेजाउंगा''
जंबो की यह बात सुनकर सब खू6ाी से उछल पडे
''जंबो की जय''
''जंबो हाथी जिंदाबाद''
' जंबो हमारा दोस्त है वह हमारी मदद करने तार है''
''सचमुच जो बात जंबो ने सोची उस के बारे में तो हम ने सोचा भी नही था''
''जंबो जिंदा बाद''
टिचरों ने सब बच्चों को बस में बैठ जाने का आदे6ा दे दिया और स्वंय भी बैठ गए
ड्रईवर भी ड्र्रविगं सीट पर जा बैठा रामू जंबो पर बैठ गया और जंबो अपने सिर,सूंड से बस को पीछे से धक्का देने लगा
बस आगे बढने लगी
जंबो धक्का देता ,बस आगे बढती ज़हां कही कोई मोड आता ड्रईवर स्टरींग से उस मोड पर बस मोड देता
जबो पुरी ताकत से बस को धक्का लगा रहा था बस अच्छी गति से आगे बढ रही थी
रात हो गई परंतु फिर भी सब निचिन्ंत थे
उन्हें वि6वास हो गया था कि अब चिंता की कोई बात नहीं है
जंबो हमे गेरेज तक पहुचा देगा और हम बस बना कर अपने घर चल देगे और ठीक समय पर अपने घर पहुच जाएगे
दो घेटे बाद जंबो ने बस को एक गेरेज में पहुंचा दिया
तुरंत गेरेज वाले बस बनाने में लग गए एक घंटे में बस की खराबी दूर हो गई
सब बच्चों बडो ने जंबो को खूब प्यार किया सहायता करने पर उसका 5ाु्रकिया अदा किया उसे खने के लिए चीजे दी
और उसे टाटा करते बस में बैठे और बस चल दी
जंबो को उनके प्यार से जितनी खू6ाी हो रही थी उसके पास प्रकट करने के लिए कोई साधन नहीं था
उसने अपनी तौर पर एक छोटा सा काम बस को धक्का लगा कर कितने लोगो का मन जीत लिया था
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