-:जंबो अंतरिक्ष में गया:-

लेखक:-एम मुबीन

 

आखिर वही हुआ जिसका भय सभी भरतीय वैज्ञानिक बहुत पहले ही व्यक्त कर चुके थे

उल्का पात से उपग्रह आरोही -3 को जबरदस्त नुकसान पंहचा वह तो बहुत अच्छा हुआ था कि वैज्ञानिकों  ने बहुत पहले ही उस संभवित उल्का पात के बारे में बहुत पहले ही बता दिया था और उस उल्कापात से होने वाले संभवित खतरों की भी सूचना भी बहुत पहले  दे दी थी

उनके अनुमान के अनुसार उल्का पात से सब से अधिक प्राभावित उपग्रह आरोही-3 हो सकता था

वह इस उल्का पात में पूरी तरहा न8ट हो सकता था उसके न8ट हो जाने से जो समस्या उठ खडी हो सकती थीं उनका हल बहुत पहले ही ढूंढ लिया गया था

उस उपग्रह के सभी कार्य एक दूसरे उपग्रह को सोप दिए थे और आरोही-3 को लगभग खाली कर दिया गया था

आका6ा में किसी धुमकेतू की पूंछ से कुछ उल्का के टूकडे गिर रहे थे और वे धरती की ओर आ रहे थे वे उल्का के टुकडे धरती तक आने से पहले अंतरिक्ष में धरती के गिर्द घूमनें वाले कई उपग्रहों से टकरा कर उनको  नुकसान पहुचाने वाले थे

 इसलिए हर किसी ने अपने उपग्रह को बचाने के लिए सावधानी के उपाए कर लिए थे

आरोही-3 उनसे बच नही सकता था इसलिए उसे उल्काओं कि दया पर छोड दिया गया था आखिर वे उल्का आरोही-3 से टकराए और उसे पूरी तरह से न8ट तो नहीं कर पाए परंतु क्षतिग्रसत कर दिया

आरोही-3 को नुकसान तो पहुंचा था परंतु फिर भी भरतीय  वैज्ञानिक इसलिए खु6ा थे कि आरोही-3 पूरी तरहा न8ट नही हूआ था

जिस बात की उन्हे 6ांका  थी

उनका अनुमान था की इस दूर्घटना के बाद आरोही-3 किसी भी काम के योग्य नहीं रहेगा वह बेकार हो जाएगा परंतु इस दूर्घटना के बाद ही उन्हों ने आरोही-3 को काम करते पाया तो उनकी बांछे खिल गईं

''आरोही-3 के बहुत से भाग काम कर रहे हैं क़ेवल वही भाग काम नहीं कर रहे हें जो क्षतिग्रस्त हूआ है हम उन बंद भागों को चालू कर के एक बार फिरसे आरोही-3 को उपयोगी बना सकते हैं

यदि ऐसा हूआ तो दे6ा के करोडों रुपये बच जांऐंगे एक उपग्रह को बनाने मेें अरबों रुप्या खर्च होता है यदि वह उपग्रह खराब या न8ट हो जाए तो वह सारा पैसा पानी में चला जाता है यदि हम आरोही-3 को उपयोग के योग्य बनाने में सफल रहे तो इस प्रकार हम हमारे दे6ा का अरबो रुपया बचाने में सफल रहेंगे''

सबने विचार किया

यह तय किया गया कि पहले आरोही-3 के पास जाकर देखा जाए कि उसे कितना नुकसान पहूंचा हैं

एक छोटे से अंतरिक्ष यान में कइ वैज्ञानिक आरोही-3 के पास गए और उन्होने उसके नुकसान का अनुमान लगाया

उन्हे नुकसान को देख कर वि6वास हो गया कि वे आरोही -3 की मरम्मत करके उसे उपयोग के योगय बना सकते है

सबसे बडी समस्या उल्का का एक बहुत बडा टुकडा था जो आरोही-3 से टकराया था और उस समय आरोही-3 के उपर ही पडा था

वह टुकडा आकार में तो बहुत बडा था वजन में भी कई टन का होगा

यदि उस उल्का के टुकडे को आरोही -3 पर से हटा दिया जाए तो आरोही-3 के पूरे नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता था अौर उस की मरम्मत का काम भी किया जा सकता था

दस वैज्ञानिकों ने मिल कर उल्का के टुकडे को आरोही-3 के उपर से हटाने की को6ाि6ा की

परंतु वह इतना वजनी था की दस आदमियों से भी नहीं हिल सका

निरा6ा वे वापस आगए और ये तय किया गया कि अंतरिक्ष गाडी में एक छोटी सी के्रेन भेजी जाए, वही उस उल्का को हटा सकेगी अंतरिक्ष गााडी से उस उल्का के टुकडे को हटाने के लिए एक छोटी सी करेन भेजी गई

परंतु वह के्रेन भी उस उल्का के तुकडे को आरोही-3 के उपर से नहीं उठा सकी और टूट गई

क्रेन के टुट जाने से सभी वैज्ञानिक निरा6 हो गए हम जब उसे उल्का को आरोही-3 से हटा ही नहीं पा रह है तो भला उसे आरोही-3 की मरम्मत किस तरह कर पांएगे

''हमे किसी भी तरह उस उल्का को हटा कर आरोही-3 को इस्तेमाल के योग्य बना कर दे6ा के अरबो रुपयों का नुकसान होने से बचाना है''

सभी वैज्ञानिक यही चाहते थे परंतु उल्का को आरोही-3 के उपर से किस तरह हटाए ? यही समझ में नहीं आ रहा था

जब हूनैन को भरतीय वैज्ञानिको की इस समस्या का पता चला तो वह अपने पिता से बोला

''डैड जो काम क्रेन नहीं कर पा रही है वही काम क्यों ना हम किसी जानवर से कराले''

''किसी जानवर से? ''हुनैन के पिता ने पूछा

 वे भारत के उन वैज्ञानिको  में से एक थे जो आरोही-3 को दोबारा उपयोग के योग्य बनाना चाहते थे

''हाथी से! में जंबो नामी एक हाथी को जनता हूं बहुत अच्छा है कठिन से कठिन काम भी कर सकता है एक बार चांद पर जाकर धरती समतल करने और पत्थर हटाने में वह हमारी मदद कर चुका है मुझे पूरा वि6वास है वह आसानी से उस उल्का को आरोही-3 के उपर से हटा कर हमारी परे6ाानी दूर कर देंगा''

जंबों को सभी जानते थे एक बार वह उनकी सहायता कर चुका था उन्हें भी वि6वास हा ेगया कि जंबो यह काम कर देगा

  इसलिए तुरंत सभी जंबो को अंतरिक्ष भेजने की तैयारी में लग गए

जंबो को अंतरिक्ष यात्रियों के वस्त्रा  पहना कर अंतरिक्ष यान में बिठा दिया गया और यान अंतरिक्ष की ओर चल दिया

 अंतरिक्ष में उस स्थान पर पहुंचकर  रुक गया जहां पर आरोही-3 स्थिर था

जंबो काें आरोही-3 पर पडा उल्का बता कर उसे हटाने का आदे6ा दे दीया गया

जंबो धीरे धीरे उल्का के बडे से पत्थर को आरोही-3 पर से हटाने लगा

पत्थर बहुत वजनी था

जंबो को पसीना आ रहा था परंतु वह उसकी परवाह किऐ बिना काम में लगा था कि इस प्रकार वह दे6ा की बहुत बडी सेवा कर रहा है दे6ा के काम आरहा है

जंबो उल्का को धीरे धीरे धकेलता रहा ऌंच इंच अपने स्थान से हटता रहा

धीरे धीरे वह आरोही-3 के किनारे आ गया

फिर जंबो ने जो जोर का धक्का दिया तो वह आरोही-3 से गिर कर अंतरिक्ष में पता नही कहां खो गया

 जंबो की इस सफलता पर सब खू6ाी से तालियां बजा कर उसे मुबारक बाद देने लगे

दूनिया में लाखों लोग इस दृ6य को अपने टी वी पर देख रहे थे जंबो सब की नजर में हिरो बन गया था जब वह अंतरिक्ष से वापस आया तो हजारों लोग उसके स्वागत के लिए धरजी पर मौजूद थे

आरोही-3 की मरम्मत का काम आखिर हा ेगया और कुछ ही दिनाें में वह दोबारा उपयोग के योगय बन गया था अौर उसने काम करना भी आरंभ कर दिया

यह जंबो के कारण संभव हा सका था

 

----------------समाप्त-------------

 

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एम मुबीन

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जिठाणे  महारा8ट्र

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-:जंबो कारगिल गया'-

लेखक:-एम मुबीन

 

 

कारगिल में घमसान का युध्द जारी था

भारतीय सेना आगे बढ रही थी आतंकवादी घसपैठियों और पाकिस्तानी सैनिक दुम दबा कर भाग रहे थे या फिर भारतीय वीर सैनिकों की गोलियो का 6ािकार हो रहे थे

कहीं कहीं तो भारतीय सेना की घेरा बंदी से उनके भागने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे उनके सामने दो ही रास्ते बचे थे

आत्मसमपर्ण कर दें या फिर भारतीय सेना की गोलियों या तोंप के गोलों का 6ािकार होेंे  जाई

 वे पहला रास्ता अपना रहे थे

सिर्फ एक 6ािखर  बची थी प्वाईंट न 112 ़

जहां पर घमसान का युध्द जारी था

घुसपैठियाें ने चोटी के उपर डेरा लगा रखा था भारतीय सेना नीचे थी, इसलिए मुकाबला करने में थोडी परे6ाानी हो रही थी

जैसे ही भारतीय सेना आगे बढने लगती, उपर से घुसपैठिये गाेिलया बरसाने लगते

 दु6मनाें का सही अनुमान ना लगने के कारण भारतीये सेना को रुकना पडता

उस तुकडी के प्रमुख कैप्टन अमर सिंह थे

बहुत सोच समझकर आपस में विचार विर्म6ा करके यह तय किया गया कि बोफोर्स तोप का उपयोग किया जाए

उसके गोले आसानी से दु6मन के ठिकानाें या दु6मन तक पहुच जाएंगे और तबाही मचाएंगे

तुरंत बोफोर्स तोप आगे बढाई गई

औॅर सचमुच उसकी गोलाबारी ने वह तबाही मचाई कि दु6मन के छक्के  छूट गए

बोकोर्स तोप के गोले दू6मन के बीच जाकर गिरते और दु6मन को खूब नुकसान पहुंचाते

जैसे जैसे तोप आगे बढ रही थी ,घुसपैठिये पीछे हट रहे थे और चारों ओर से घिर रहे थे

उनके लिए भागने के सारे रास्ते भी बंद होते जा रहे थे अमर सिंह और उनके साथी बहुत खु6ा थे

जिस गति से उन्हें सफलता मिल रही थी, उन्हें लग रहा था एक दो दिन में वे चोटी पर दोबारा अधिकार जमा कर सारे घुसपैठियों कंों रौनदने में सफल हो जाएगे

अचानक वह दुर्घटना हो गई

उपर चढते हुए तापे थोडी सी फिसली और उसका एक पहिया एक बडे से गडडे में बुरी तरहा फंस गया और पूरे प्रयत्न के बाद भी ना तो तोप आगे बढ सकी और ना पहिया गडडे से निकल सका

अब स्थिती यह हो गई थी कि तोप जो गोला बारुद बरसा रही थी वह एक सीमित सीमा तक जा कर गिर रहे थे अपनी सीमा के आगे नही जा रहे थे

घुसपैठिये उस क्षेत्र से पीछे हट गए थें जहां उन्हें क्षति पहुंच सकती थी

इस लिए े एक सुरक्षित सीमा में घुसपैठीयो ने अपना नया ठिकाना बना लिया था और वे वहां पूरी तरह सुरक्षित थे

''तोप को गडडे से बाहर निकाल कर आगे लेजाना बहुत जरुरी है वरना वे घुसपैतठये महीनों तक वहां जमे रहेंगे ''अमर सिह बोले

जितने सैनिक और उनके वाहन वहां थे वे मिल कर तोप को गडडे से बाहर निकालने का प्रयत्न कर रहे थे परंतु तोप इतनी 5ाक्ति लगने पर भी एक इंच भी अपने स्थान से नहीं हिलती थी

कई सैनिक गाडियां बुलाई गई उनसे तोप को बांध कर खेेंचकर तोप को गडडे के बाहर निकालने का प्रयत्न किया गया परंतु कोई सफलता नही मिल सकी

दरसल तोप का पहिया गडडे में फस गया था इसलिए वह हील भी नही पा रहा था

यदि पतहये को उठाकर तोप को वहां से हिलाने का प्रयतन किया जाता तो तोप का पहिया निकल जाता परंतु सौ आदमियों में भी इतनी 5ाक्ति नहीं थी कि गडडे में े फंसे तोप के पहिये को हिला सके

 दो दिन हो गय थे

''ओह दो दिन हो गए, हम तोप के पतहये को गडडे के बाहर नही निकाल पाए अातंकवादीयों को आराम मिल रहा है वे और मजबूत हो रहे है क्या किया जाए? कुछ समझ में नही आता ''अमर सिह जी बोले

''सर मेरे दिमाग में एक प्लान है ''एक सैनिक दिलेर बोला

''क्याा प्लान है?''

''मैने इस इलाके में जंबो नाम का एक हाथी देख है वह अपने मालिक रामू के साथ यहां आया है वह बहुत 5क्तिी6ााली है वह आसानी से अपनी सूंड से पहिये को गडडे के बाहर निकाल सकता ह''ै दिलेर बोला

''अगर ऐसा हो सकता है तो यह बहुत अच्छी बात है ज़ाओ तुरंत उस हाथी को ले आओ''

दिलेर तुरंत जंबो की खेज में निकल गया

दो घन्टे की खेज के बाद उसे जंबो औेर रामू मिल गए

दिलेर ने उम्हे सारी बातें बताई तो रामू बोला

'' मेैं और मेरा जंबो दे6ा कें किसी काम आए इससे बढकर हमारे लिए खु6ाी की बात और क्या हो सकती है''

जंबो ने भी सिर हिलाया

और तीनाें उस स्थान की ओर चल दिये

जब वे वहां पहुचे तो सब ने उन्हें घेर लिया

सारे सिपाही जंबो से बातें और प्यार करने लगे

फिर जंबो ने अपना काम 5ाुरु किया अपनी सूंड से पकडकर उसने गडडे से बाहर निकालने का प्रयात्न किया तो जंबो को भी पसीने छूट गये

 एक तो तोप बहुत वजनी थी दूसरा पहिया बुरी तरहा फंसा हुआ था

''लगाओ जंबो जोर लगाओ''

''को6ाि6ा  करो जंबो तुम यह काम कर सकते हो'' सारे सिपाही जंबो का हौसला बढा रहे थे

''जंबो तुम दे6ा के लिए बहुत बडा काम करने जा रहे हो''

 जब जंबो ने यह बात सुनी तो उसे भी जो6ा आ गया और उसने पूरी 5ाक्ति लगाई पहिया गडडे के बाहर निकल गया

तोप चलाने वाले ने तुरंत तोप आगे बढा दी तोप गडडे से निकल गई थी

सब ख6ाी से चीखने  लगे

उसके बाद तोप जो गोले बरसाती आगे बढी तो दो घंटे में सारे घूसपैठियों का सफाया हो गया प्वाईट नं 112 पर दोबारा भारतीय सेना ने कब्जा कर के जंबो के हाथो तिरंगा लगााया

 

 

 

 

-----------------------समाप्त-----------------------

       

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